Wednesday, May 25, 2016

त्रिफला :-

एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को रात को सोते समय 5 मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट के सभी प्रकार के रोग] स्वप्नदोष तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती प्रदान करता है।

Tuesday, May 24, 2016

ताबें के बर्तन का पानी

ताबें के बर्तन में पानी पीना कितना फ़ायदे मंद हैं । ===================सेहत के लिए पानी पीना अच्छी आदत है। स्वस्थ रहने के लिए हर इंसान को दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। आयुर्वेद में कहा गया है सुबह के समय तांबे के पात्र का पानी पीना विशेष रूप से लाभदायक होता है। इस पानी को पीने से शरीर के कई रोग बिना दवा ही ठीक हो जाते हैं। साथ ही, इस पानी से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रात को इस तरह तांबे के बर्तन में संग्रहित पानी को ताम्रजल के नाम से जाना जाता है।
ये ध्यान रखने वाली बात है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है। जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि तांबे के बर्तन का पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में…
1.हमेशा दिखेंगे जवान
कहते हैं, जो पानी ज्यादा पीता है उसकी स्किन पर अधिक उम्र में भी झुर्रियां दिखाई नहीं देती हैं। ये बात एकदम सही है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप तांबे के बर्तन में जल को रखकर पिएं तो इससे त्वचा का ढीलापन आदि दूर हो जाता है। डेड स्किन भी निकल जाती है और चेहरा हमेशा चमकता हुआ दिखाई देता है।
2. थायराइड को करता है नियंत्रित
थायरेक्सीन हार्मोन के असंतुलन के कारण थायराइड की बीमारी होती है। थायराइड के प्रमुख लक्षणों में तेजी से वजन घटना या बढ़ना, अधिक थकान महसूस होना आदि हैं। थायराइड एक्सपर्ट मानते है कि कॉपर के स्पर्श वाला पानी शरीर में थायरेक्सीन हार्मोन को बैलेंस कर देता है। यह इस ग्रंथि की कार्यप्रणाली को भी नियंत्रित करता है। तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से रोग नियंत्रित हो जाता है।
3. गठिया में होता है फायदेमंद
आजकल कई लोगों को कम उम्र में ही गठिया और जोड़ों में दर्द की समस्या सताने लगती हैं। यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो रोज तांबे के पात्र का पानी पिएं। गठिया की शिकायत होने पर तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीने से लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में ऐसे गुण आ जाते हैं, जिनसे बॉडी में यूरिक एसिड कम हो जाता है और गठिया व जोड़ों में सूजन के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलता है।
4. स्किन को बनाए स्वस्थ-
अधिकतर लोग हेल्दी स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। वो मानते हैं कि अच्छे कॉस्मेटिक्स यूज करने से त्वचा सुंदर हो जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। स्किन पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसलिए अगर आप अपनी स्किन को हेल्दी बनाना चाहते हैं तो तांबे के बर्तन में रातभर पानी रखें और सुबह उस पानी को पी लें। नियमित रूप से इस नुस्खे को अपनाने से स्किन ग्लोइंग और स्वस्थ लगने लगेगी।
5. दिल को बनाए हेल्दी
तनाव आजकल सभी की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसलिए दिल के रोग और तनाव से ग्रसित लोगों की संख्या तेजी बढ़ती जा रही है। यदि आपके साथ भी ये परेशानी है तो तो तांबे के जग में रात को पानी रख दें। सुबह उठकर इसे पी लें। तांबे के बर्तन में रखे हुए जल को पीने से पूरे शरीर में रक्त का संचार बेहतरीन रहता है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है और दिल की बीमारियां दूर रहती हैं।
6. खून की कमी करता है दूर
एनीमिया या खून की कमी एक ऐसी समस्या है जिससे 30 की उम्र से अधिक की कई भारतीय महिलाएं परेशान हैं। कॉपर के बारे में यह तथ्य सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक है कि यह शरीर की अधिकांश प्रक्रियाओं में बेहद आवश्यक होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को अवशोषित करने का काम करता है। इसी कारण तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से खून की कमी या विकार दूर हो जाते हैं।
7. कैंसर से लड़ने में सहायक
कैंसर होने पर हमेशा तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल पीना चाहिए। इससे लाभ मिलता है। तांबे के बर्तन में रखा हुआ जल वात, पित्त और कफ की शिकायत को दूर करता है। इस प्रकार के जल में एंटी-ऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो इस रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, कॉपर कई तरीके से कैंसर मरीज की हेल्प करता है। यह धातु लाभकारी होती है।
8. सूक्ष्मजीवों को खत्म करता है
तांबे की प्रकृति में ऑलीगोडायनेमिक के रूप में ( बैक्टीरिया पर धातुओं की स्टरलाइज प्रभाव ) माना जाता है। इसीलिए इसके बर्तन में रखे पानी के सेवन से हानिकारक बैक्टीरिया को आसानी से नष्ट किया जा सकता है। इसमें रखे पानी को पीने से डायरिया, दस्त और पीलिया जैसे रोगों के कीटाणु भी मर जाते हैं, लेकिन पानी साफ और स्वच्छ होना चाहिए।

Monday, May 23, 2016

यूरिक ऐसिड

* यूरिक एसिड, प्यूरिन के टूटने से बनता है जो खून के
माध्यम से बहता हुआ किडनी तक पहुंचता है। ‪#‎यूरिक‬
एसिड, शरीर से बाहर, पेशाब के रूप में निकल जाता है।
लेकिन, कभी - कभार यूरीक एसिड शरीर में ही रह
जाता है और इसकी मात्रा बढ़ने लगती है। ऐसा होना
शरीर के लिए घातक होता है।
* क्या होता है यूरिक अम्ल ...?
* कार्बन,हाईड्रोजन,आक्सीजन और नाईट्रोजन तत्वों
से बना यह योगिक जिस का अणुसूत्र C5H4N4O3.यह
एक विषमचक्रीय योगिक है जो कि शरीर को
प्रोटीन से एमिनोअम्ल के रूप मे प्राप्त होता है.
प्रोटीनों से प्राप्त ऐमिनो अम्लों को चार प्रमुख
वर्गों में विभक्त किया गया है
उदासीन ऐमिनो अम्ल
अम्लीय ऐमिनो अम्ल
क्षारीय ऐमिनो अम्ल
विषमचक्रीय ऐमिनो अम्ल.
* यह आयनों और लवण के रूप मे यूरेट और एसिड यूरेट जैसे
अमोनियम एसिड यूरेट के रूप में शरीर मे उपलब्ध है.
प्रोटीन एमिनो एसिड के संयोजन से बना होता है।
पाचन की प्रक्रिया के दौरान जब प्रोटीन टूटता है
तो शरीर में यूरिक एसिड बनता है जब शरीर मे प्यूरीन
न्यूक्लिओटाइडों टूट जाती है तब भी यूरिक एसिड
बनता है. प्युरीन क्रियात्मक समूह होने के कारण यूरिक
अम्ल एरोमेटिक योगिक होते हैं. शरीर मे यूरिक अम्ल
का स्तर बढ़ जाने की स्तिथि को hyperuricemia
कहते हैं. हम प्रोटीन कहाँ से प्राप्त करते है और प्रोटीन
क्यों जरूरी हो शरीर के लिए ये जानना भी जरूरी
हो जाता है ....?
* मनुष्यों और अन्य जीव जंतुओं के लिए प्रोटीन बहुत
जरूरी आहार है. इससे शरीर की नयी कोशिकाएँ और
नये ऊतक बनते हैं पुरानी कोशिकाओं और उत्तको की
टूटफूट की मरम्मत के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी आहार है.
प्रोटीन के अभाव से शरीर कमजोर हो जाता है और
कईं रोगों से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रोटीन शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है.
वृद्धिशील शिशुओं,बच्चो,किशोरों और गर्भवती
स्त्रियों के लिए अतरिक्त प्रोटीन भोजन की मांग
ज्यादा होती है परन्तु 25 वर्ष की आयु के बाद कम
शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियों के लिए अधिक
मात्रा मे प्रोटीन युक्त भोजन लेना उनके लिए यूरिक
अम्लों की अधिकताजन्य दिक्कतों का खुला
निमंत्रण साबित होते हैं.
* रेड मीट(लाल रंग के मांस), सी फूड, रेड वाइन, दाल,
राजमा, मशरूम, गोभी, टमाटर, पालक,
मटर,पनीर,भिन्डी,अरबी,चावलआदि के अधिक मात्रा
में सेवन से भी यूरिक एसिड बढ जाता है।
उच्च यूरिक एसिड के कारण :-
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शरीर में यूरिक ऐसिड बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं.....
* भोजन के रूप मे लिए जाने वाले प्रोटीन प्युरीन और
साथ मे उच्च मात्रा मे शर्करा का लिया जाना रक्त
मे यूरिक एसिड की मात्रा को बढाता है.
* कई लोगों मे वंशानुगत कारणों को भी यूरिक एसिड
के ऊँचे स्तर के लिए जिम्मेवार माना गया है.
* गुर्दे द्वारा सीरम यूरिक एसिड के कम उत्सर्जन के
कारण भी इसका स्तर रक्त मे बढ़ जाता है.
* उपवास या तेजी से वजन घटाने की प्रक्रिया मे भी
अस्थायी रूप से यूरिक एसिड का स्तर आश्चर्यजनक स्तर
तक वृद्धि कर जाता हैं.
* रक्त आयरन की अधिकता भी यूरेट स्तर को बढ़ाती है
जिस पर आयरन त्याग यानी रक्तदान से नियंत्रण
किया जा सकता है.
* पेशाब बढ़ाने वाली दवाएं या डायबटीज़ की
दवाओं के प्रयोग से भी यूरिक ऐसिड बढ़ सकता है.
उच्च यूरिक एसिड के नुकसान :-
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* इसका सबसे बड़ा नुकसान है शरीर के छोटे जोड़ों मे
दर्द जिसे गाउट रोग के नाम से जाना जाता है. मान
लो आप की उम्र 25 वर्ष से ज्यादा है और आप उच्च
आहारी हैं रात को सो कर सुबह जागने पर आप महसूस
करते है कि आप के पैर और हाथों की उँगलियों अंगूठों के
जोड़ो मे हल्की हल्की चुभन जैसा दर्द है तो आप को
यह नहीं मान लेना चाहिये कि यह कोई थकान का
दर्द है आप का यूरिक एसिड स्तर बड़ा हुआ हो सकता है.
तो अगर कभी आपके पैरों की उंगलियों, टखनों और
घुटनों में दर्द हो तो इसे मामूली थकान की वजह से
होने वाला दर्द समझ कर अनदेखा न करें यह आपके शरीर
में यूरिक एसिड बढने का लक्षण हो सकता है. इस
स्वास्थ्य समस्या को गाउट आर्थराइट्सि कहा
जाता है.
गाउट आर्थराइट्सि गठिया का एक रूप :-
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* गाउट एक तरह का गठिया रोग ही होता है. जिस
के कारण शरीर के छोटे ज्वाईन्ट्स प्रभावित होते हैं और
विशेषकर पैरों के अंगूठे का जोड़ और उँगलियों के जोड़ व
उँगलियों मे जकड़न रहती है. हालाँकि इससे एड़ी, टख़ने,
घुटने, उंगली, कलाई और कोहनी के जोड़ भी प्रभावित
हो सकते हैं. इसमें बहुत दर्द होता है. जोड़ पर सुर्ख़ी और
सूजन आ जाती है और बुख़ार भी आ जाता है. यह
शरीर में यूरिक ऐसिड के बढ़ने से पैदा होती है.
(पेशियों में जमा यूरिक एसिड क्रिस्टल, मस्क्युलर
रिह्यूमेटिज्म के रूप में सामने आता है, तो जोड़ों के बीच
जमा एसिड क्रिस्टल आरथ्राइटिस के रूप में जोड़ों के
बीच एसिड क्रिस्टल जमा होने से चलने-फिरने पर चुभने
जैसा दर्द और टीस होती है जोड़ों में जकड़न आ सकती
है.)
* यह बढ़ा हुआ यूरिक एसिड रक्त के साथ शरीर के अन्य
स्थानों मे पहुँच जाता है. खास तौर पर हड्डियों के
संधि भागों मे जाकर रावों के रूप मे जमा होना शुरू
हो जता है. यह जन्म देती है साध्य रोग शरीर के छोटे
जोड़ों मे दर्द गाउट Gout को.
जोड़ो मे जमा यूरिक एसिड के क्रिस्टल :-
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* अगर यूरिक ऐसिड बढ़ जाए तो वह बहुत नन्हें-नन्हे
क्रिस्टलों के रूप में जमा हो जाता है. हड्डियों मे
ख़ासतौर से जोड़ों के आस पास. ये क्रिस्टल बहुत ही
धारदार होते हैं. जो की जोड़ों की चिकनी
झिल्ली में चुभते हैं. चुभन और भयंकर दर्द पैदा करते हैं.
गाउट रोग के कारण जोड़ों को घुमाने या गति
उत्पन्न करने में कठिनाई महसूस होती है. ठंडी या शीत
हवाओं के कारण पीड़ा बढ़ जाती है. इसकी सबसे बड़ी
पहचान यह है की इसमें रात में दर्द बढ़ जाता है और सुबह
शरीर अकड़ता है.
* व्यक्ति की किडनी भीतरी दीवारों की
लाइनिंग क्षतिग्रस्त हो तो ऐसे में यूरिक एसिड बढने
की वजह से किडनी में स्टोन भी बनने लगता है.
* यूरिक एसिड के असंतुलन से ही गठिया जैसी
समस्याएं हो जाती है। उच्च यूरिक एसिड की मात्रा
को नियंत्रित करना अति आवश्यक होता है। नियंत्रण
के लिए यूरिक एसिड़ बढ़ने के कारण को जानना
आवश्यक है। अगर आपको यह समस्या आनुवांशिक है तो
इसे बैलेंस किया जा सकता है लेकिन अगर शरीर में
किसी प्रकार की दिक्कत है जैसे - किडनी का सही
तरीके से काम न करना आदि तो डॉक्टरी सलाह लें
और दवाईयों का सेवन करें। शरीर में हाई यूरिक एसिड
का अर्थ होता है कि आप जो भी भोजन ग्रहण करते है
उसमें प्यूरिन की मात्रा में कमी है जो शरीर में प्यूरिन
की बॉन्डिंग को तोड़ देती है और यूरिक एसिड बढ़
जाता है। यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के कुछ
टिप्स निम्म प्रकार हैं...
* अगर शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा लगातार
बढ़ती है तो आपको भरपूर फाइबर वाले फूड खाने
चाहिए। दलिया, पालक, ब्रोकली आदि के सेवन से
शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रित हो
जाती है..
* यह प्रयास करें कि अधिक से अधिक मात्रा में पानी
पीया जाए, इससे रक्त में मौजूद अतिरिक्त यूरिक
एसिड मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है.
* यदि दर्द बहुत ज्यादा है तो दर्द वाले स्थान पर बर्फ
को कपडे मे लपेट कर सिंकाई करने से फायदा होता है.
खान-पान की आदत बदलें शरीर में जमा अतिरिक्त
यूरिक एसिड को उदासीन करने के लिए खानपान में
क्षारीय पदार्थों की मात्रा को बढ़ाना
चाहिए। फलों, हरी सब्जियों, मूली का जूस, दूध,
बिना पॉलिश किए गए अनाज इत्यादि में अल्कली
की मात्रा अधिक होती है
* शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा को कम करने के
लिए हर दिन 500 मिलीग्राम विटामन सी लें. एक
दो महीने में यूरिक एसिड काफी कम हो जाएगा.
* जैतून के तेल में बना हुआ भोजन, शरीर के लिए
लाभदायक होता है। इसमें विटामिन ई भरपूर मात्रा
में होता है जो खाने को पोषक तत्वों से भरपूर बनाता
है और यूरिक एसिड को कम करता है। आश्चर्य की बात
है, लेकिन यह सच है।खाना बनाने के लिए बटर या
वेजटेबल ऑयल के बजाए कोल्ड प्रेस्ड जैतून के तेल का
इस्तेमाल करें. तेल को गर्म कर देने पर इससे जल्द ही दुर्गध
आने लगती है. दुर्गधयुक्त फैट शरीर के विटामिन ई को
नष्ट कर देता है. यह विटामिन यूरिक एसिड के लेवल
को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होता है. जैतून के
तेल के इस्तेमाल से शरीर में अतिरिक्त यूरिक एसिड
नहीं बनेगा.
* अजवाइन के बीज का अर्क भी गठिया और यूरिक
एसिड की समस्या का यह एक प्रसिद्ध प्राकृतिक
उपचार है. अजवाइन के बीज का इस्तेमाल गठिया रोग
के उपचार में लंबे समय से किया जाता रहा है. अजवाइन
में दर्द को कम करने, एंटीऑक्सीडेंट और डाइयूरेटिक गुण
पाया जाता है. साथ ही इसे यूरेनरी एंटीसेप्टिक भी
माना जाता है. कई दुर्भल मामलों में नींद न आने की
समस्या, व्याग्रता और नर्वस ब्रेकडाउन का उपचार
भी इससे किया जाता है. इसके बीज का इस्तेमाल
जहां कई तरह के हर्बल सप्लीमेंट्स में किया जाता है
वहीं इसकी जड़ भी काफी उपयोगी होती है.
* बेकरी के फूड स्वाद में लाजबाव होते है लेकिन इसमें
सुगर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसके अलावा,
इनके सेवन से शरीर में यूरिक एसिड़ भी बढ़ जाता है।
अगर यूरिक एसिड कम करना है तो पेस्ट्री और केक
खाना बंद कर दें।
* पानी की भरपूर मात्रा से शरीर के कई विकार
आसानी से दूर हो जाते है। दिन में कम से कम दो से तीन
लीटर पानी का सेवन करें। पानी की पर्याप्त
मात्रा से शरीर का यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते से
बाहर निकल जाएगा। थोड़ी - थोड़ी देर में पानी
को जरूर पीते रहें।
* चेरी में एंटी - इंफ्लामेट्री प्रॉपर्टी होती है जो
यूरिक एसिड को मात्रा को बॉडी में नियंत्रित
करती है। हर दिन 10 से 40 चेरी का सेवन करने से शरीर
में उच्च यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रित रहती है,
लेकिन एक साथ सभी चेरी न खाएं बल्कि थोड़ी -
थोड़ी देर में खाएं।
* हर दिन ली जाने खुराक में कम से कम 500 ग्राम
विटामिन सी जरूर लें। विटामिन सी, हाई यूरिक
एसिड को कम करने में सहायक होता है और यूरिक
एसिड को पेशाब के रास्ते निकलने में भी मदद करता है।
यकृत की शुद्धि के लिए नींबू अक्सीर है। नींबू का
साईट्रिक ऐसिड भी यूरिक एसिड का नाश करता है।
* एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन: लाल शिमला मिर्च,
टमाटर, ब्लूबेरी, ब्रोकली और अंगूर एंटीऑक्सीडेंट
विटामिन का बड़ा स्रोत है. एंटीऑक्सीडेंट
विटामिन फ्री रेडिकल्स अणुओं को शरीर के अंग और
मसल टिशू पर आक्रमण करने से रोकता है, जिससे यूरिक
एसिड का स्तर कम होता है.
* शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढने पर इसे कम
करना आसान नहीं होता । लेकिन शतावर
(asparagus) की जड़ का चूर्ण 2-3 ग्राम की मात्रा
में प्रतिदिन दूध या पानी के साथ लिया जाए , तो
यूरिक एसिड घटना प्रारम्भ हो जाता है और शरीर
की कमजोरी भी दूर होती है ।
* गाजर और चुकन्दर का जूस भी पीते रहें इससे और भी
जल्दी लाभ होगा ।
* सेब का सिरका भी रक्त का पीएच वैल्यू बढ़ाकर
हाई यूरिक एसिड लेवल को कम करता है. पर सेब का
सिरका कच्चा, बिना पानी मिला और बिना
पाश्चरीकृत होना चाहिए. हेल्थ फूड स्टोर से आप इसे
आसानी से हासिल कर सकते हैं.

Monday, May 16, 2016

अलोपथी बीमारी का नहीं हैं,

आम सी हो गयी हैं, और अलोपथी में इसका कोई इलाज भी नहीं हैं, बस जीवन भर दवाई लेते रहो, और आराम कोई नहीं।
थायराइड मानव शरीर मे पाए जाने वाले एंडोक्राइन ग्लैंड में से एक है। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर एवं स्वर यन्त्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। इसका आकार तितली जैसा होता है। यह थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है जिससे शरीर के ऊर्जा क्षय, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है।
थॉयराइड ग्रंथि तितली के आकार की होती है जो गले में पाई जाती है। यह ग्रंथि उर्जा और पाचन की मुख्य ग्रंथि है। यह एक तरह के मास्टर लीवर की तरह है जो ऐसे जीन्स का स्राव करती है जिससे कोशिकाएं अपना कार्य ठीक प्रकार से करती हैं। इस ग्रंथि के सही तरीके से काम न कर पाने के कारण कई तरह की समस्‍यायें होती हैं। इस लेख में विस्‍तार से जानें थॉयराइड फंक्‍शन और इसके उपचार के बारे में।
थॉयराइड को साइलेंट किलर माना जाता है, क्‍योंकि इसके लक्षण व्‍यक्ति को धीरे-धीरे पता चलते हैं और जब इस बीमारी का निदान होता है तब तक देर हो चुकी होती है। इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से इसकी शुरुआत होती है लेकिन ज्यादातर चिकित्‍सक एंटी बॉडी टेस्ट नहीं करते हैं जिससे ऑटो-इम्युनिटी दिखाई देती है।
* यह ग्रंथि शरीर के मेटाबॉल्जिम को नियंत्रण करती है यानि जो भोजन हम खाते हैं यह उसे उर्जा में बदलने का काम करती है।
* इसके अलावा यह हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों व कोलेस्ट्रोल को भी प्रभावित करती है।
*आमतौर पर शुरुआती दौर में थायराइड के किसी भी लक्षण का पता आसानी से नहीं चल पाता, क्योंकि गर्दन में छोटी सी गांठ सामान्य ही मान ली जाती है। और जब तक इसे गंभीरता से लिया जाता है, तब तक यह भयानक रूप ले लेता है।
आखिर क्या कारण हो सकते है जिनसे थायराइड होता है।
* थायरायडिस- यह सिर्फ एक बढ़ा हुआ थायराइड ग्रंथि (घेंघा) है, जिसमें थायराइड हार्मोन बनाने की क्षमता कम हो जाती है।
* इसोफ्लावोन गहन सोया प्रोटीन, कैप्सूल, और पाउडर के रूप में सोया उत्पादों का जरूरत से ज्यादा प्रयोग भी थायराइड होने के कारण हो सकते है।
* कई बार कुछ दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव भी थायराइड की वजह होते हैं।
* थायराइट की समस्या पिट्यूटरी ग्रंथि के कारण भी होती है क्यों कि यह थायरायड ग्रंथि हार्मोन को उत्पादन करने के संकेत नहीं दे पाती।
* भोजन में आयोडीन की कमी या ज्यादा इस्तेमाल भी थायराइड की समस्या पैदा करता है।
* सिर, गर्दन और चेस्ट की विकिरण थैरेपी के कारण या टोंसिल्स, लिम्फ नोड्स, थाइमस ग्रंथि की समस्या या मुंहासे के लिए विकिरण उपचार के कारण।
* जब तनाव का स्तर बढ़ता है तो इसका सबसे ज्यादा असर हमारी थायरायड ग्रंथि पर पड़ता है। यह ग्रंथि हार्मोन के स्राव को बढ़ा देती है।
* यदि आप के परिवार में किसी को थायराइड की समस्या है तो आपको थायराइड होने की संभावना ज्यादा रहती है। यह थायराइड का सबसे अहम कारण है।
* ग्रेव्स रोग थायराइड का सबसे बड़ा कारण है। इसमें थायरायड ग्रंथि से थायरायड हार्मोन का स्राव बहुत अधिक बढ़ जाता है। ग्रेव्स रोग ज्यादातर 20 और 40 की उम्र के बीच की महिलाओं को प्रभावित करता है, क्योंकि ग्रेव्स रोग आनुवंशिक कारकों से संबंधित वंशानुगत विकार है, इसलिए थाइराइड रोग एक ही परिवार में कई लोगों को प्रभावित कर सकता है।
* थायराइड का अगला कारण है गर्भावस्था, जिसमें प्रसवोत्तर अवधि भी शामिल है। गर्भावस्था एक स्त्री के जीवन में ऐसा समय होता है जब उसके पूरे शरीर में बड़े पैमाने पर परिवर्तन होता है, और वह तनाव ग्रस्त रहती है।
* रजोनिवृत्ति भी थायराइड का कारण है क्योंकि रजोनिवृत्ति के समय एक महिला में कई प्रकार के हार्मोनल परिवर्तन होते है। जो कई बार थायराइड की वजह बनती है।
थायराइड के लक्षण:–
कब्ज- थाइराइड होने पर कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है। खाना पचाने में दिक्कत होती है। साथ ही खाना आसानी से गले से नीचे नहीं उतरता। शरीर के वजन पर भी असर पड़ता है।
हाथ-पैर ठंडे रहना- थाइराइड होने पर आदमी के हाथ पैर हमेशा ठंडे रहते है। मानव शरीर का तापमान सामान्य यानी 98.4 डिग्री फॉरनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) होता है, लेकिन फिर भी उसका शरीर और हाथ-पैर ठंडे रहते हैं।
प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना- थाइराइड होने पर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम़जोर हो जाती है। इम्यून सिस्टम कमजोर होने के चलते उसे कई बीमारियां लगी रहती हैं।
थकान– थाइराइड की समस्या से ग्रस्त आदमी को जल्द थकान होने लगती है। उसका शरीर सुस्त रहता है। वह आलसी हो जाता है और शरीर की ऊर्जा समाप्त होने लगती है।
त्वचा का सूखना या ड्राई होना– थाइराइड से ग्रस्त व्यक्ति की त्वचा सूखने लगती है। त्वचा में रूखापन आ जाता है। त्वचा के ऊपरी हिस्से के सेल्स की क्षति होने लगती है जिसकी वजह से त्वचा रूखी-रूखी हो जाती है।
जुकाम होना– थाइराइड होने पर आदमी को जुकाम होने लगता है। यह नार्मल जुकाम से अलग होता है और ठीक नहीं होता है।
डिप्रेशन- थाइराइड की समस्या होने पर आदमी हमेशा डिप्रेशन में रहने लगता है। उसका किसी भी काम में मन नहीं लगता है, दिमाग की सोचने और समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। याद्दाश्त भी कमजोर हो जाती है।
बाल झड़ना- थाइराइड होने पर आदमी के बाल झड़ने लगते हैं तथा गंजापन होने लगता है। साथ ही साथ उसके भौहों के बाल भी झड़ने लगते है।
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और साथ ही साथ कमजोरी का होना भी थायराइड की समस्या के लक्षण हो सकते है।
शारीरिक व मानसिक विकास- थाइराइड की समस्या होने पर शारीरिक व मानसिक विकास धीमा हो जाता है।
अगर आपको ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अपने डाक्टर से संपर्क करें आपको थाइराइड समस्या हो सकती है।

Tuesday, May 10, 2016

** एलाेवेरा **

एलाेवेरा के गुदाे काे निकालकर उसमे गुलाब का पानी मिलाकर लेप तैयार कर ले। इस लेप काे अपने चेहरे पर लगाने से पहलें, नीम के पानी से अपने चेहरे काे अच्छी तरह से धुल लें, फिर इस लेप काे अपने चेहरे पर लगा ले, १५-२० मिनट के बाद ताजा पानी से अपने चेहरे काे धुल लें, साफ़ सूती तौलिये से चेहरे काे पाेंछ ले। उसके बाद चेहरे पर थोड़ा गुलाब का पानी लगाकर चेहरे पर ऊपर से नीचे हल्के हाथों से ५ मिनट तक मसाज करें, आपका चेहरा खिल उठेगाँ-
25 मिली ग्लिसरीन और 25 मिली शुद्ध गुलाब जल में 5 ग्राम सल्फर पावडर मिलाएं। इस लेप को रात में चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहासे पर लगाकर छोड़ दें। सबेरे पानी से चेहरा धोएं। इस लेप से एक हफ्ते में आप एक्ने की प्रॉब्लम से निजात पा सकते हैं। बेहतरीन रिजल्ट पाने के लिए सप्ताह में 3 बार इसे लगाएं।
जायफल को घिसकर दस पीसी काली मिर्च व थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। दो घंटे बाद चेहरा धोलें।
सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में घिसकर लगाने से भी दाग- धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं।
टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागो पर मलें। या टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग- धब्बे दूर होते हैं।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर नींबू का टुकड़ा रगड़े या नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े। इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर मुलतानी मिट्टी का लेप करें 10-15 मिनट के बाद चेहरे काे सामान्य ताजा पानी से धाेले, मुलतानी मिट्टी का लेप मुंहासों के दाग-धब्बाें काे कम करने का सबसे सरल आैर असरकारक उपचार हैं जिसका किसी भी तरह के त्वचा पर काेई Side-effect भी नहीं होता है-
मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें।

Wednesday, May 4, 2016

** मुहांसे**

सफेद मुहांसे से भी काले मुँहासों की तरह त्वचा में चिकनाई जम जाने के कारण होते है । इन काले और सफेद मुँहासों में अंतर यह है कि जहां की त्वचा मुलायम और चिकनी होती है वहां रोम छिद्रों में चिकनाई बाहर नहीं निकल पाती इसलिये अंदर ही अंदर वह पस के रूप में बाहर की तरफ उभर आती है । जो ऊपर की तरफ से सफेद तथा नीचे से काले मुँहासों की तरह दिखाई देती है । अधिक चिकनी त्वचा के लिये यह अधिक परेशानी पैदा करती है । इन्हें समाप्त करने के लिये बाजार में उपलब्ध सौन्दर्य प्रसाधन व कुछ घरेलू नुसख़े काम में लाये जा सकते है।
चेहरे को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ तौलिये से पोंछ लें और फिर सल्फर लोशन लगाएं । इसके बाद गर्म पानी में तौलिया भिगोकर चेहरे को भाप दें। इस उपाय को करने से त्वचा के बंद छिद्र खुल जायेंगे तथा इसके साथ-साथ आप विटामिन बी. सी की गोलियों का सेवन भी करते रहें ।