Tuesday, June 7, 2016

खांसी है... तो इसे आजमायें !

10 ग्राम फिटकरी को तवा गर्म करके उस पर रख दें।
थोड़ी देर बुदबुदाहट के बाद वह
फिटकरी ठंडी होकर
बैठ जावेगी । फिर
उसी फिटकरी को चाकू
जैसी किसी नोकदार वस्तु से उस गर्म तवे
पर पलट दें।
थोड़ी देर में वह फिटकरी बुदबदाते
दिखेगी व बैठ
जावेगी । यह शोधित
फिटकरी कहलाती है । इस
फिटकरी को बेलन की मदद से बिल्कुल
बारीक पीस
लें और इसमें 100 ग्राम शक्कर का बुरा मिलाकर इसे
एकजान करके इसकी बराबर वजन की 15
पुडिय़ा बना लें। अगर खांसी कफ
वाली हो तो इस
पुडिय़ा को सुबह-शाम पानी से लें,
सुखी हो तो गुनगुने
दूध से इसका सेवन करें।

Monday, June 6, 2016

** खूबसूरत होंठ**

होंठों को खूबसूरत बनाने के लिए आप
क्या नहीं करतीं। लिपस्टिक, लिप बाम,
माश्चराइजर और ना जाने क्या-क्या। लेकिन, होंठों पर लगाये जाने वाले
कई उत्पाद वास्तव में उन्हें खूबसूरत बनाने के बजाय लंबे समय में
उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप भी अपने
होठों के फटने या कालेपन से परेशान हैं तो इस स्लाइड शो में बताए
गए प्राकृतिक उपायों को अपनाकर अपनी समस्या से
छुटकारा पा सकते हैं।
कोको बटर
दो बड़े चम्मच कोको बटर, आधा छोटा चम्मच मधु वैक्स
लीजिए। उबलते पानी पर एक बर्तन में
वैक्स डालकर पिघला दीजिए। इसमें कोको बटर मिलाएं। अब
इस मिश्रण को ठंडा होने के बाद ब्रश की मदद से
होंठों पर लगाइए। इससे होंठ मुलायम होंगे और उनका कालापन दूर
हो जाएगा।
दूध की मलाई
होंठों से रूखापन हटाने के लिए
थोडी सी मलाई में चुटकी भर
हल्दी मिलाकर नियमित रूप से धीरे-
धीरे होठों पर मालिश करें। आप देखेंगे कि इस घरेलू उपाय
से कुछ ही दिनों में आपके होठ मुलायम और
गुलाबी होने लगेंगे
गुलाब की पंखुडियां
होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए गुलाब
की पंखुडि़यां बहुत ही फायदेमंद
होती है। इसके नियमित इस्तेमाल से होठों का रंग
हल्का गुलाबी और चमकदार हो जाएगा इसके लिए गुलाब
की पंखुडियों को पीसकर उसमें
थोड़ी सी नींबू
क्या आप जानते है होंठों को कालापन नींबू से
भी दूर हो सकता है। इसके लिए आप निचोड़े हुए
नींबू को अपने होठों पर सुबह और शाम को रगड़ें।
केसर
होंठों का कालापन दूर करने के लिये कच्चे दूध में केसर
पीसकर होंठों पर मलें। इसके इस्तेमाल से
होंठों का कालापन तो दूर होता ही है साथ
ही वे पहले से अधिक आकर्षक बनने लगते हैं।
शहद
शहद के इस्तेमाल से कुछ ही दिनों में आपके होंठ
चमकदार और मुलायम हो जाते हैं। इसके लिए थोड़ा-सा शहद
अपनी उंगली में लेकर धीरे-
धीरे अपने होंठों पर मलें या फिर शहद में
थोड़ा सा सुहागा मिलाकर अपने होंठों पर लगाएं। ऐसा एक दिन में दो बार
करें फिर देखें इसका असर।
जैतून का तेल
यदि होंठ पूरी तरह से फट चुके हैं और उनमें कालापन
भी आ रहा है तो जैतून का तेल यानी ऑलिव
ऑयल और वैसलीन मिलाकर दिन में तीन
या चार बार फटे होंठों पर लगाने से फायदा होता है। इनका लेप
होंठों पर 4-5 दिन लगातार लगाने से होठों की दरारें
भी भरने लगती हैं और होंठ हल्के
गुलाबी भी होने लगते हैं।
चुकंदर
चुकंदर को ब्लड बनाने वाली मशीन
भी कहते है। चुकंदर होंठ के लिए
भी उतना ही फायदेमंद होता है। चुकंदर
को काटकर उसके टुकड़े को होंठों पर लगाने से होठ
गुलाबी व चमकदार बनते हैं। —

Sunday, June 5, 2016

करेला के फायदा

१) कड़वे करेले में बीमारियो से
लड़ने की उम्दा शक्ति है| प्रति
100 ग्राम करेले में लगभग 92 ग्राम
नमी होती है। साथ ही इसमें
लगभग 4 ग्राम कार्बोहाइडेट, 15
ग्राम प्रोटीन, 20 मिलीग्राम
कैल्शियम, 70 मिलीग्राम
फस्फोरस, 18 मिलीग्राम, आयरन
तथा बहुत थोड़ी मात्रा में वसा
भी होती है। इसमें विटामिन ए
तथा सी भी
होती है जिनकी मात्रा प्रति
100 ग्राम में क्रमश: 126
मिलीग्राम तथा 88
मिलीग्राम होती है।
२) करेला मधुमेह में रामबाण
औषधि का कार्य करता है,
छाया में सुखाए
हुए करेला का एक चम्मच पावडर
प्रतिदिन सेवन करने से
डायबिटीज में चमत्कारिक
लाभ मिलता है क्योंकि करेला
पेंक्रियाज को उत्तेजित कर
इंसुलिन के स्रावण को बढ़ाता
है।
३) विटामिन ए की उपस्थिति
के कारण इसकी सब्जी खाने से
रतौंधी रोग नहीं होता है।
जोड़ों के दर्द में करेले की सब्जी
का सेवन व जोड़ों पर करेले के
पत्तों का रस लगाने से आराम
मिलता है।
४) करेले के तीन बीज और तीन
कालीमिर्च को पत्थर पर पानी
के साथ घिसकर बच्चों को
पिलाने से उल्टी-दस्त बंद होते हैं।
करेले के पत्तों को सेंककर सेंधा
नमक मिलाकर खाने से अम्लपित्त
के रोगियों को भोजन से पहले
होने वाली उल्टी बंद होती है।
५) करेला खाने वाले को कफ की
शिकायत नहीं होने पाती। इसमें
प्रोटीन तो भरपूर पाया जाता
है। इसके अलावा करेले में
कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट और
विटामिन पाए जाते हैं। करेले
की छोटी और बड़ी दो प्रकार
की प्रजाति होती है, जिससे
इनके कसैलेपन में भी अंतर आता है।
६) करेले का रस और 1 नींबू का रस
मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर
की चर्बी कम होती है और
मोटापा कम होता है।
पथरी रोगी को 2 करेले का रस
प्रतिदिन पीना चाहिए और
इसकी सब्जी खाना चाहिए।
इससे पथरी गलकर पेशाब के साथ
बाहर निकल जाती है।
७) लकवे के रोगियों को करेला
जबरदस्त फायदा पहुंचाता है।
दस्त और उल्टी की शिकायत
की सूरत में करेले का रस
निकालकर उसमें काला नमक और
थोड़ा पानी मिलाकर पीने से
फायदा देखा गया है।

Saturday, June 4, 2016

"मौत को छोड कर हर मर्ज की दवाई है कलौंजी"

कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में ठीक करती है।
[A] कैसे करें इसका सेवन?
कलौंजी के बीजों का सीधा सेवन किया जा सकता है।
एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका सेवन करें।
पानी में कलौंजी उबालकर छान लें और इसे पिएँ।
दूध में कलौंजी उबालें। ठंडा होने दें फिर इस मिश्रण को पिएँ।
कलौंजी को ग्राइंड करें व पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर इसका सेवन करें।
[B] ये किन-किन रोगों में सहायक है?
1/. टाइप-2 डायबिटीज:
प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन के परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम होता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।
2/. मिर्गी:
2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम करता है।
3/. उच्च रक्तचाप:
100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम होता है।
रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। तथा 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच
कलौंजी का तेल मिलाकर पूर शरीर पर मालिश आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक करना चाहिए।
4/. गंजापन:
जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।
5/. त्वचा के विकार:
कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट होते हैं।
6/. लकवा:
कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक होता है।
7/. कान की सूजन, बहरापन:
कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर होती है। इससे बहरापन में भी लाभ होता है।
8/. सर्दी-जुकाम:
कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी-जुकाम समाप्त होता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी-जुकाम
ठीक होता है। यह पुराने जुकाम भी लाभकारी होता है।
9/. कलौंजी को पानी में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।
10/. छींके:
कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी बंद हो जाती है।
11/. पेट के कीडे़:
दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रात सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।
12/. प्रसव की पीड़ा:
कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर होती है।
13/. पोलियों का रोग:
आधे कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक होता है।
14/. मुँहासे:
सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को साफ करने से मुंहासे कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं।
15/. स्फूर्ति:
स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान दूर होती है।
16/. गठिया:
कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया रोग समाप्त होता है।
17/. जोड़ों का दर्द:
एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक होता है।
18/. आँखों के सभी रोग:
आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आँखों के रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2बार सेवन करें। इससे आँखों के सभी रोग ठीक होते हैं। आँखों के चारों और तथा पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आँखों के रोग समाप्त होते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।
19/. स्नायुविक व मानसिक तनाव:
एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव दूर होता है।
20/. गांठ:
कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट होती है।
21/. मलेरिया का बुखार:
पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार ठीक होता है।
22/. स्वप्नदोष:
यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे स्वप्नदोष दूर होता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने स्वप्न दोष का रोग ठीक होता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन न करें।
23/. कब्ज:
चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट होती है।
24/. खून की कमी:
एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर होती है। रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
25/. पेट दर्द:
किसी भी कारण से पेट दर्द हो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्का गर्म
पानी मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक होता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त होता है।
26/. सिर दर्द:
कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक होता है। कलौंजी खाने के साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोगों भी दूर होते हैं।
कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
कलौंजी और काला जीरा बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर होता है।
27/. उल्टी:
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद होती है।
28/. हार्निया:
तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग ठीक होता है।
29/. मिर्गी के दौरें:
एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक होते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- अमरूद, केला, सीताफल आदि नहीं देना चाहिए।
30/. पीलिया:
एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त होता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए।
31/. कैंसर का रोग:
एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग ठीक होता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को देना चाहिए। इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर खाना चाहिए।
32/. दांत:
कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक होता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे साफ व स्वस्थ रहते हैं।
दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन: रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से कीड़े नष्ट होते हैं।
33/. नींद:
रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है।
34/. मासिकधर्म:
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू होता है। इससे गर्भपात होने की संभावना नहीं रहती है।
जिन माताओं बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का कष्ट दूर होता है और बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट होती है।
मासिकधर्म की अनियमितता में लगभग आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगता है।
यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।
कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू होता है।
35/. गर्भवती महिलाओं को वर्जित:
*गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।*
36/. स्तनों का आकार:
कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से स्तनों का आकार बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।
37/. स्तनों में दूध:
कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से स्तनों में दूध बढ़ता है।
38/. स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन:
कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर होती है।
39/. बाल लम्बे व घने:
50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने होते हैं।
40/. बेरी-बेरी रोग:
बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है।
41/. भूख का अधिक लगना:
50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और सूबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम होता है।
42/. नपुंसकता:
कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।
43/. खाज-खुजली:
50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग ठीक होता है।
44/. नाड़ी का छूटना:
नाड़ी का छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर होता है और नाड़ी की गति भी तेज होती है। इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें। कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन दूर होती है।
45/. हिचकी:
एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर होती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से हिचकी दूर होती है। और यदि
3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से हिचकी ठीक होती है।
46/. स्मरण शक्ति:
लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।
47/. पेट की गैस:
कलौंजी, जीरा और अजवाइन को बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट होता है।
48/. पेशाब की जलन:
250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

Thursday, June 2, 2016

knowledge abut simple life

1. अगर किसी का अपहरण हो जाए और उसके हाथ बांध दिए जाएं तो मुंह पर चिपके टेप को निकालने के लिए उसे चाटना चाहिए। वह खुदबखुद गिर जाएगा।
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2. केले में मूड बदलने के गुण होते हैं। इससे चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और अवसाद दूर होते हैं।
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3. सिरदर्द में नींबू के रस को माथे पर बाम की तरह लगाने से आराम होता है।
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4. रात्रि में शराब पीने के बाद सुबह होने वाले सिरदर्द से निजात पाने के लिए केला और दूध से बना मिल्कशेक बहुत फायदेमंद होता है।
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5. अगर आपके फोन में स्क्रेच आ गए हैं तो थोड़ा टूथपेस्ट लगा दीजिए ।
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6. औसतन हवाई यात्रा के टिकट यात्रा के दिन से 54 दिन पहले सबसे अधिक सस्ते होते हैं।
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7. हमेशा अपने जूतों के रंग से मिलते जुलते रंग के बेल्ट पहनने से आप फैशन का सबसे खास टिप्स
अपना लेते हैं।
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8. मैथ्स करते समय चॉकलेट खाने से आपकी मैथ्स हल करने की योग्यता बढ़ जाती है।
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9. अगर कपड़े सिकुडकर छोटे हो गए हैं तो उन्हें गर्म पानी और हेयर कंडीशनर के घोल में 5 मिनिट के लिए भिगो दीजिए। वे वापस अपने पुराने साइज में आ जाएंगे।

**आवला**

१) आवला व ध्रत्कुमारी का रस २-२ चम्मच पानी के साथ लें. 
२) मेथी के दाने एक चम्मच रात को पानी में भिगोकर रखें, सुबह सबेरे उठकर पानी पीकर दाना खा लें.
३) १ ककड़ी, १ टमाटर, १ करेला, ५ कोमल नीम के पत्ते, ५ सदाबहार के फूल का रस पियें.
आधा घंटे तक कुछ भी नहीं खाएं.
४) जामुन की गुठली का पावडर सुबह नाश्ते से पहले लें.
५) सुबह हर्बल टी या काली चाय (जिसमे दूध, नीबू या शक्कर न हो) पियें.
६ ) अमरुद के पत्ते रात को पानी में भिगोकर रखें, सुबह वो पानी खाली पेट पियें.
कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां :-
मधुनाशिनी
२-२ गोली दिन में २ या ३ बार खाना खाने से पहले या खाने के बाद लें.
शिलाजीत
दिन में दो बार १-१ बूँद गर्म दूध में डालकर लें.
इन सबके साथ अपने गुस्से को काबू में रखें. तनाव व गुस्से से मधुमेह बढ़ता है. नींद भी पर्याप्त मात्रा में करें. यह सब योग से ही संभव हो सकता है.
नियमित रूप से योग करें जिसके द्वारा शरीर व मन पर काबू पाया जा सकता है.

**अदरक**

अदरक रूखा, तीखा, उष्ण-तीक्ष्ण होने के
कारण कफ
तथा वात का नाश करता है, पित्त को बढ़ाता है। इसका अधिक
सेवन रक्त की पुष्टि करता है। यह उत्तम आमपाचक
है।
भारतवासियों को यह सात्म्य होने के कारण भोजन में
रूचि बढ़ाने के लिए इसका सार्वजनिक उपयोग किया जाता है।
आम से उत्पन्न होने वाले अजीर्ण, अफरा, शूल,
उलटी आदि में तथा कफजन्य सर्दी-
खाँसी में अदरक बहुत
उपयोगी है।
सावधानीः रक्तपित्त, उच्च रक्तचाप, अल्सर, रक्तस्राव

कोढ़ में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। अदरक
साक्षात
अग्निरूप है। इसलिए इसे कभी फ्रिज में
नहीं रखना चाहिए
ऐसा करने से इसका अग्नितत्त्व नष्ट हो जाता है।
औषधि-प्रयोगः
उलटीः अदरक व प्याज का रस समान मात्रा में मिलाकर
3-3
घंटे के अंतर से 1-1 चम्मच लेने से अथवा अदरक के रस में
मिश्री में मिलाकर पीने से
उलटी होना व जौ मिचलाना बन्द
होता है।
हृदयरोगः अदरक के रस व पानी समभाग मिलाकर
पीने से
हृदयरोग में लाभ होता है।
मंदाग्निः अदरक के रस में नींबू व सेंधा नमक मिलाकर
सेवन
करने से जठराग्नि तीव्र होती है।
उदरशूलः 5 ग्राम अदरक, 5 ग्राम पुदीने के रस में थोड़ा-
सा सेंधा नमक डालक पीने से उदरशूल मिटता है।
शीतज्वरः अदरक व पुदीने का काढ़ा देने से
पसीना आकर ज्वर
उतर जाता है। शीतज्वर में लाभप्रद है।
पेट की गैसः आधा-चम्मच अदरक के रस में
हींग और
काला नमक मिलाकर खाने से गैस की तकलीफ
दूर होती है।
सर्दी-खाँसीः 20 ग्राम अदरक का रस 2
चम्मच शहद के
साथ सुबह शाम लें। वात-कफ प्रकृतिवाले के लिए अदरक व
पुदीना विशेष लाभदायक है।
खाँसी एवं श्वास के रोगः अदरक और
तुलसी के रस में शहद
मिलाकर लें।