Monday, May 16, 2016
Tuesday, May 10, 2016
** एलाेवेरा **
एलाेवेरा के गुदाे काे निकालकर उसमे गुलाब का पानी मिलाकर लेप तैयार कर ले।
इस लेप काे अपने चेहरे पर लगाने से पहलें, नीम के पानी से अपने चेहरे काे
अच्छी तरह से धुल लें, फिर इस लेप काे अपने चेहरे पर लगा ले, १५-२० मिनट के
बाद ताजा पानी से अपने चेहरे काे धुल लें, साफ़ सूती तौलिये से चेहरे काे
पाेंछ ले। उसके बाद चेहरे पर थोड़ा गुलाब का पानी लगाकर चेहरे पर ऊपर से
नीचे हल्के हाथों से ५ मिनट तक मसाज करें, आपका चेहरा खिल उठेगाँ-
25 मिली ग्लिसरीन और 25 मिली शुद्ध गुलाब जल में 5 ग्राम सल्फर पावडर मिलाएं। इस लेप को रात में चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहासे पर लगाकर छोड़ दें। सबेरे पानी से चेहरा धोएं। इस लेप से एक हफ्ते में आप एक्ने की प्रॉब्लम से निजात पा सकते हैं। बेहतरीन रिजल्ट पाने के लिए सप्ताह में 3 बार इसे लगाएं।
जायफल को घिसकर दस पीसी काली मिर्च व थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। दो घंटे बाद चेहरा धोलें।
सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में घिसकर लगाने से भी दाग- धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं।
टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागो पर मलें। या टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग- धब्बे दूर होते हैं।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर नींबू का टुकड़ा रगड़े या नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े। इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर मुलतानी मिट्टी का लेप करें 10-15 मिनट के बाद चेहरे काे सामान्य ताजा पानी से धाेले, मुलतानी मिट्टी का लेप मुंहासों के दाग-धब्बाें काे कम करने का सबसे सरल आैर असरकारक उपचार हैं जिसका किसी भी तरह के त्वचा पर काेई Side-effect भी नहीं होता है-
मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें।
25 मिली ग्लिसरीन और 25 मिली शुद्ध गुलाब जल में 5 ग्राम सल्फर पावडर मिलाएं। इस लेप को रात में चेहरे के दाग-धब्बे, मुंहासे पर लगाकर छोड़ दें। सबेरे पानी से चेहरा धोएं। इस लेप से एक हफ्ते में आप एक्ने की प्रॉब्लम से निजात पा सकते हैं। बेहतरीन रिजल्ट पाने के लिए सप्ताह में 3 बार इसे लगाएं।
जायफल को घिसकर दस पीसी काली मिर्च व थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। दो घंटे बाद चेहरा धोलें।
सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में घिसकर लगाने से भी दाग- धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं।
टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागो पर मलें। या टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग- धब्बे दूर होते हैं।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर नींबू का टुकड़ा रगड़े या नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े। इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा।
त्वचा पर जहां पर चकते हो उनपर मुलतानी मिट्टी का लेप करें 10-15 मिनट के बाद चेहरे काे सामान्य ताजा पानी से धाेले, मुलतानी मिट्टी का लेप मुंहासों के दाग-धब्बाें काे कम करने का सबसे सरल आैर असरकारक उपचार हैं जिसका किसी भी तरह के त्वचा पर काेई Side-effect भी नहीं होता है-
मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें।
Wednesday, May 4, 2016
** मुहांसे**
सफेद मुहांसे से भी काले मुँहासों की तरह त्वचा में चिकनाई जम जाने के कारण होते है । इन काले और सफेद मुँहासों में अंतर यह है कि जहां की त्वचा मुलायम और चिकनी होती है वहां रोम छिद्रों में चिकनाई बाहर नहीं निकल पाती इसलिये अंदर ही अंदर वह पस के रूप में बाहर की तरफ उभर आती है । जो ऊपर की तरफ से सफेद तथा नीचे से काले मुँहासों की तरह दिखाई देती है । अधिक चिकनी त्वचा के लिये यह अधिक परेशानी पैदा करती है । इन्हें समाप्त करने के लिये बाजार में उपलब्ध सौन्दर्य प्रसाधन व कुछ घरेलू नुसख़े काम में लाये जा सकते है।
चेहरे को पानी से अच्छी तरह धोकर साफ तौलिये से पोंछ लें और फिर सल्फर लोशन लगाएं । इसके बाद गर्म पानी में तौलिया भिगोकर चेहरे को भाप दें। इस उपाय को करने से त्वचा के बंद छिद्र खुल जायेंगे तथा इसके साथ-साथ आप विटामिन बी. सी की गोलियों का सेवन भी करते रहें ।
Tuesday, April 19, 2016
**त्वचा के लिए नुकसानदेह हो सकता है नहाने वाला साबुन**
बचपन से ही हम साबुन का प्रयोग करते आ रहे हैं, जिस साबुन से हम नहाते हैं उससे चेहरा भी धोते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं शरीर से दुर्गंध और कीटाणुओं का खात्मा करने वाला यह साबुत त्वचा के लिए कितना नुकसानदेह होता है।
नहाने के साबुन के नुकसान
त्वचा यदि सुंदर और कोमल हो तो लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर ही लेती है। लेकिन इसे कोमल बनाए रखने के लिये इसके खास देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में बचपन से ही हमारा जुड़ाव बाथरूम से होता ही है और नियमित साबुन से नहाने की सलाह भी दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं साबुन त्वचा के लिये ठीक नहीं होता। यह शरीर से दुर्गंध तो शायद मिटा देता है लेकिन इससे कई त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। चलिये जानें नहाने के साबुन को ना कहने की क्या वजहें हैं
एंटी बैक्टीरियल साबुन पर रोक
अमेरिका एंटी बैक्टीरियल साबुन पर जल्द रोक लगाने के विषय पर विचाराधीन है। हाल में आई रिपोर्ट्स में पाया गया है कि इन साबुनों में ऐसे रसायन हैं जो हार्मोन में बदलाव करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। एफडीए के अनुसार इस प्रकार के साबुनों में आमतौर पर ट्रिकलोसन और ट्रिकलोकार्बन जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनसे सेहत को काफी नुकसान हो सकता है।
सरफेक्टेन्ट
सरफेक्टेन्ट एक प्रकार का रसायन होता है, जोकि पानी और साबुन का मिश्रण होता है। यह गंदगी को दूर करने का काम करता है। लेकिन इससे त्वचा पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है और त्वचा खराब हो सकती है।
साबुन खरीदते समय लापरवाही
रोजमर्रा में प्रयोग किये जाने वाले साबुनों को खरीदते वक्त लोग अकसर सोचते नहीं हैं। इस प्रकार के ज्यादातर साबुनों में खुशबू, डिटर्जेट और कुछ अन्य प्रकार के रसायन होते हैं, जो हमारी त्वचा को तो साफ कर देते हैं, लेकिन नमी को छीन लेते हैं।
अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं
ये साबुन जीवाणुओं को तो मार देते हैं लेकिन जब आप इन साबुनों का प्रयोग करते हैं तो शरीर में जमा अच्छे बैक्टीरिया का भी नाश हो जाता है। ये अच्छे बैक्टीरिया दरअसल त्वचा पर मौजूद घातक बैक्टीरिया का नाश करते हैं।
त्वचा से विटामिन डी छीन लेते हैं
त्वचा विटामिन डी को भीतर सोखे इससे पहले ये साबुन उसे त्वचा से ही हटा देते हैं। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि हमारी त्वचा को विटामिन डी को भीतर समाने में लगभग 48 घंटे लगते हैं, लेकिन ये सबुन इससे पहले ही उसे हटा देते हैं।
फेरोमोन्स नामक कैमिकल का सफाया
फेरोमोन्स एक प्रकार का कैमिकल होता है जो अपोजिट सेक्स का ध्यान खींचने में सहायक होता है। यह कैमिकल हमारे पसीने में मौजूद होता हैं, जो नहाने के साबुन की वजह से धुल जाता है
कीटाणुनाशक
ऐसे नहाने के साबुनों में ट्रिक्लोशन (फिनायल के रूप में प्रयोग किये जाने वाला एक प्रकार का रसायन) अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है, जो आपकी त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होता है। इस प्रकार के साबुन को रोज प्रयोग में लाने से त्वचा को भारी नुकसान होता है।
Friday, April 8, 2016
**सर्दियों में डिप्रेशन, ब्लडप्रेशर से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान**
(1)-----सर्दियों का मजा अच्छे से लेने के लिए इस समय विशेष सावधानी रखना बेहद जरूरी होता है। यह माना हुआ तथ्य है कि सर्दियां अपने साथ कई बीमारियां भी लाती हैं। थोड़ी सी सावधानी बरतने पर सर्दियों के ये दिन आपके लिए अच्छे दिन साबित होंगे।
(2)-----सर्दियों में दिन छोटे हो जाते हैं, जिससे हार्मोन में असंतुलन पैदा होता है और शरीर में विटामिन डी की कमी आती है। इससे दिल और दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। इस मौसम में खासकर उम्रदराज लोगों को अवसाद घेर लेता है, जिससे उनमें तनाव और हाइपरटेंशन काफी बढ़ जाता है।
(3)-----सर्दियों के अवसाद से पीड़ित लोग अक्सर ज्यादा चीनी, ट्रांस फैट और सोडियम व ज्यादा कैलोरी वाला भोजन खाने लगते हैं। मधुमेह और हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है। इस मौसम में आम तौर पर निमोनिया भी हो जाता है।
(4)----इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के महासचिव डॉ. केके अग्रवाल बताते हैं कि सर्दियों में होने वाली निमोनिया, अवसाद, हाइपोथर्मिया व ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव सहित अन्य बीमारियां रोकी जा सकती हैं। इसके लिए जीवनशैली की कुछ आदतों में थोड़ा सा बदलाव करके इनका आसानी से इलाज किया जा सकता है।
(5)-----उन्होंने कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को सलाह दी जाती है कि वे सर्दियों में शराब का सेवन न करें, क्योंकि यह मुश्किलें पैदा कर सकती है। सेहतमंद आहार लें और उटपटांग खाने से बचें। थोड़े-थोड़े अंतराल पर आहार लेना ज्यादा बेहतर रहता है।
🏻------इन (11) बातों का रखें ध्यान :-------👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾
(1)-----सर्दियों के अवसाद से बचने के लिए लंबे समय तक धूप मे बैठें या चारदीवारी के अंदर बत्ती जला कर रहें।
(2)----गर्मियों की तुलना में सर्दियों में तड़के ब्लड प्रेशर ज्यादा होता है। इसलिए ब्लड प्रेशर के मरीजों को चाहिए कि वह अपने डॉक्टर से सर्दियों में ब्लड प्रेशर की दवा बढ़ाने को कहें।
(3)---- सर्दियों में दिल के दौरे भी अधिक पड़ते हैं, इसलिए सुबह-सुबह सीने में होने वाले दर्द को नजरअंदाज न करें।
(4)----- सर्दियों में ज्यादा मीठा, कड़वा और नमकीन खाने से परहेज करें।
(5)----- सभी को अपने डॉक्टर से निमोनिया और फ्लू की वैक्सीन के बारे में पूछना चाहिए।
(6)----- बहुत छोटी उम्र और उम्रदराज लोगों के निमोनिया सर्दियों में जानलेवा हो सकता है, ज्यादा खतरे वाले लोगों खास कर दमा, डायबिटीज और दिल के रोगों से पीडि़त लोगों को फ्लू का वैक्सी जरूर दिलाएं।
(7)------ सर्दियों में बंद कमरों में हीटर चला कर सोने से बचें।
(8)---- गीजर सहित सभी बिजली यंत्रों की अर्थिंग की जांच करवाएं।
(9)----- मीठे पकवान बनाते समय चीनी का प्रयोग करने से बचें।
(10)---- एक तापमान से दूसरे तापमान में जाने से पहले अपने शरीर को संतुलित तापमान पर ढलने का समय दें।
(11)----- विटामिन डी अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है। हर व्यक्ति को हर रोज सुबह 10 बजे से पहले और शाम 4 बजे के बाद कम से कम 40 मिनट धूप में जरूर बिताएं।
जैन आयुर्वेद संजीवनी
Monday, March 14, 2016
**वमन उल्टी **
@ हिचकी तथा उल्टी में आंवले का 10-20 मिलीलीटर रस, 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से आराम होता है।
इसे दिन में 2-3 बार लेना चाहिए। केवल इसका चूर्ण 10-50 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ भी दिया जा सकता है।
त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) से पैदा होने वाली उल्टी में आंवला तथा अंगूर को पीसकर 40 ग्राम खांड, 40 ग्राम शहद और 150 ग्राम जल मिलाकर कपड़े से छानकर पीना चाहिए।
आंवले के 20 ग्राम रस में एक चम्मच मधु और 10 ग्राम सफेद चंदन का चूर्ण मिलाकर पिलाने से वमन (उल्टी) बंद होती है।
आंवले के रस में पिप्पली का बारीक चूर्ण और थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आने के रोग में लाभ होता है।
आंवला और चंदन का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर 1-1 चम्मच चूर्ण दिन में 3 बार शक्कर और शहद के साथ चाटने से गर्मी की वजह से होने वाली उल्टी बंद हो जाती है।
आंवले का फल खाने या उसके पेड़ की छाल और पत्तों के काढ़े को 40 ग्राम सुबह और शाम पीने से गर्मी की उल्टी और दस्त बंद हो जाते हैं।
आंवले के रस में शहद और 10 ग्राम सफेद चंदन का बुरादा मिलाकर चाटने से उल्टी आना बंद हो जाती है।
संग्रहणी : -मेथी दाना के साथ इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर 10 से 20 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार पिलाने से संग्रहणी मिट जाती है।
"मूत्रकृच्छ (पेशाब में कष्ट या जलन होने पर) : -* आंवले की ताजी छाल के 10-20 ग्राम रस में दो ग्राम हल्दी और दस ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से मूत्रकृच्छ मिटता है।
आंवले के 20 ग्राम रस में इलायची का चूर्ण डालकर दिन में 2-3 बार पीने से मूत्रकृच्छ मिटता है।
विरेचन (दस्त कराना) : -रक्त पित्त रोग में, विशेषकर जिन रोगियों को विरेचन कराना हो, उनके लिए आंवले के 20-40 मिलीलीटर रस में पर्याप्त मात्रा में शहद और चीनी को मिलाकर सेवन कराना चाहिए।
अर्श (बवासीर) : -* आंवलों को अच्छी तरह से पीसकर एक मिट्टी के बरतन में लेप कर देना चाहिए। फिर उस बरर्तन में छाछ भरकर उस छाछ को रोगी को पिलाने से बवासीर में लाभ होता है।
बवासीर के मस्सों से अधिक खून के बहने में 3 से 8 ग्राम आंवले के चूर्ण का सेवन दही की मलाई के साथ दिन में 2-3 बार करना चाहिए।
सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 ग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रात भर भिगोकर रखें। दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में 5 ग्राम चिरचिटा की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। इसको पीने से बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाती है और मस्से सूखकर गिर जाते हैं।
सूखे आंवले को बारीक पीसकर प्रतिदिन सुबह-शाम 1 चम्मच दूध या छाछ में मिलाकर पीने से खूनी बवासीर ठीक होती है।
आंवले का बारीक चूर्ण 1 चम्मच, 1 कप मट्ठे के साथ 3 बार लें।
आंवले का चूर्ण एक चम्मच दही या मलाई के साथ दिन में तीन बार खायें।
शुक्रमेह :
-धूप में सुखाए हुए गुठली रहित आंवले के 10 ग्राम चूर्ण में दुगनी मात्रा में मिश्री मिला लें। इसे 250 ग्राम तक ताजे जल के साथ 15 दिन तक लगातार सेवन करने से स्वप्नदोष (नाइटफॉल), शुक्रमेह आदि रोगों में निश्चित रूप से लाभ होता है।
खूनी अतिसार (रक्तातिसार) : -यदि दस्त के साथ अधिक खून निकलता हो तो आंवले के 10-20 ग्राम रस में 10 ग्राम शहद और 5 ग्राम घी मिलाकर रोगी को पिलायें और ऊपर से बकरी का दूध 100 ग्राम तक दिन में 3 बार पिलाएं।
रक्तगुल्म (खून की गांठे) : -आंवले के रस में कालीमिर्च डालकर पीने से रक्तगुल्म खत्म हो जाता है।
प्रमेह (वीर्य विकार) : -* आंवला, हरड़, बहेड़ा, नागर-मोथा, दारू-हल्दी, देवदारू इन सबको समान मात्रा में लेकर इनका काढ़ा बनाकर 10-20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम प्रमेह के रोगी को पिला दें।
आंवला, गिलोय, नीम की छाल, परवल की पत्ती को बराबर-बराबर 50 ग्राम की मात्रा में लेकर आधा किलो पानी में रातभर भिगो दें। इसे सुबह उबालें, उबलते-उबलते जब यह चौथाई मात्रा में शेष बचे तो इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से पित्तज प्रमेह नष्ट होती है।
पित्तदोष : -आंवले का रस, शहद, गाय का घी इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर आपस में घोटकर लेने से पित्त दोष तथा रक्त विकार के कारण नेत्र रोग ठीक होते हैं
Sunday, March 6, 2016
How growth our blood,
शरीर में तेजी से खून बढ़ाने के घरेलु उपय। .......
शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है।
शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है।
इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुवेर्दिक उपायों को अपनाना चाहिए।
1. तिल और शहद
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दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
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दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।
2. काफी और चाय खतरनाक
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काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।
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काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।
3.ठंडा स्नान
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दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने केबाद सूरज की रोशनी में बैठें।
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दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने केबाद सूरज की रोशनी में बैठें।
4.अंकुरित भोजन
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आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।
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आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।
5.आम
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पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसाकरने से खून तेजी से बढ़ता है।
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पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसाकरने से खून तेजी से बढ़ता है।
6.मूंगफली और गुड़
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शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली केदानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
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शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली केदानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।
7.सिंघाड़ा
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सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
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सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।
8.मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर
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मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।
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मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।
9.फलो का सेवन
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अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।
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अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।
10.आंवले और जामुन का रस
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आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
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आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।
11.टमाटर का रस
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एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।
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एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।
12. हरी सब्जिया
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बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
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बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
13.फालसा
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फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।
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फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।
14.लहसुन
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शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।
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शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।
15.सेब का जूस
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सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इसजूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।
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सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इसजूस में लौह तत्व ज्यादा होता है।
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